आसमान का रंग नीला क्यों दिखाई देता है

 
आसमान का रंग नीला क्यों दिखाई देता है

क्यों है आसमान नीला ? 
आइये जानते है क्या है इसका राज...

यदि हम अंतरिक्ष में जाकर आकाश को देखें, तो वह नीला नहीं दिखेगा। दरअसल अंतरिक्ष में आकाश का कोई रंग ही नहीं होता, इसलिए वह काला दिखेगा। पर पृथ्वी पर आकाश नीला दिखाई देता है। पर क्यों?

इस रहस्य का संबंध पृथ्वी के वायुमंडल से है। पृथ्वी अनेक गैसों के मिश्रण से बने वायुमंडल से घिरा हुआ है। इन गैसों के अलावा वायुमंडल में धूल के कण, पराग कण, आदि अन्य महीन पदार्थ भी होते हैं। गैसें स्वयं अणुओं से बनी होती हैं, जो अत्यंक्ष सूक्ष्म कण ही होते हैं। 

जब सूर्य का प्रकाश वायुमंडल में प्रवेश करता है, तो वह इन कणों से टकराता है। वास्तव में सूर्य से आनेवाला प्रकाश अनेक तरंगों से बना होता है। इनमें से सात तरंगों को हमारी आंखें देख सकती हैं और इनका अलग-अलग रंग होता है, जो इस प्रकार है बैंगनी, आसमानी, नीला, हरा, पीला, नारंगी और लाल। 

इन तरंगों में से प्रत्येक का तरंग-दैर्घ्य भी अलग-अलग होता है। जहां बैंगनी का तरंग-दैर्घ्य सबसे छोटा होता है, लाल का सबसे अधिक।

जब प्रकाश किसी कण से टकराता है, तो या तो वह उस कण के आर-पार निकल जाता है, अथवा उसके द्वारा परावर्तित या छितरा दिया जाता है। 
उन्नीसवीं सदी में हुए जोन टिंडल नामक वैज्ञानिक ने दिखाया कि प्रकाश का कणों के आर-पार निकलना या उनके द्वारा परावर्तित या छितरा दिया जाना प्रकाश के तरंग-दैर्घ्य पर निर्भर करता है। 

दृश्य प्रकाश के अंशों में से नीला प्रकाश सर्वाधिक छितराया जाता है, जबकि लाल प्रकाश सबसे कम।

इसलिए सूर्य प्रकाश का लाल अंश तो बितना छितराए पृथ्वी तक पहुंच जाता है, पर नीला प्रकाश हवा में मौजूद गैस अणुओं, धूल कल, पराग आदि से छितरा दिया जाता है और बहुत देर तक हवा में ही बना रहता है। इसी छितराई हुई नीली रोशनी के कारण आकाश हमें नीला दिखाई देता है।

सूर्योदय या सूर्यास्त के समय आसमान लाल क्यों दिखता है

सूर्योदय या सूर्यास्त के समय आसमान लाल क्यों दिखता है

होता यह है सूर्योदय या सूर्यास्त के समय प्रकाश हमारी आंखों तक हवा में अधिक लंबी दूरी तय करके आता है। इस लंबी यात्रा में उसका नीला अंश तो छितारा दिया जाता है, जबकि लाल अंश आगे बढ़ता रहता है। इसलिए हमारी आंखों को आसमान लाल दिखाई देता है।

क्या आपको मालूम है, खतरे का संकेत देने के लिए लाल बत्ती का क्यों उपयोग किया जाता है? यह भी टिंडल प्रभाव पर ही आधारित है। लाल रोशनी हवा में मौजूद कणकीय सामग्री द्वारा सबसे कम छितराई जाती है। 

इसलिए धूल, धुंध, बारिश आदि में भी लाल रोशनी अधिक आसानी से दिखाई देती है, और लोगों को खतरे की सूचना मिलती रहती है।

इसी कारण से यातायात बत्तियों में भी रुकने के संकेत के लिए लाल बत्ती का उपयोग किया जाता है, ताकि उसका उल्लंघन करने पर जब पुलिस कर्मी आपको धर ले, आप यह न कह सकें कि वह आपको दिखी ही नहीं।